मूल निवासियों के अधिकारों संबंधी संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा पत्र के उपरांत भारत के विरुद्ध सक्रिय शक्तियों ने भारत में अनुसूचित जातियों और जनजातियों को ही मूलनिवासी प्रमाणित करने का अभियान छेड़ कर शेष सब हिंदुओं के विरुद्ध व्यापक अभियान छेड़ दिया है।
इसके लिए नितांत अप्रामाणिक ,अनैतिहासिक, कूट रचित ,जालसाजी और फरेब से भरपूर दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं और अनेक संस्थाएं इसके लिए सक्रिय हैं।
आपको यह यदि नहीं पता है तो आप सचमुच किसी पीड़ित समूह की वास्तविक शिकायत मानकर निश्चिंत बैठे रहेंगे ।
ऊपर से पहले कांग्रेस शासन और फिर अब मोदी शासन ने अनुसूचित जातियों को झूठी शिकायतें करने का विशेष अधिकार इस रूप में दे दिया है कि शिकायत होते ही आरोपी को हवालात में बंद कर दिया जाएगा और जेल भी भेजा जा सकता है।
जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहज ही अभिलेखीय प्रमाण सुलभ हो जाएगा कि वास्तव में भारत में व्यापक हिंदू समाज ने अनुसूचित जातियों के साथ भीषण अन्याय किया ।ऐसा अन्याय किया जो विश्व में यूरोपीय लोगों ने कभी भी नहीं किया ।।
इस प्रकार का महा झूठ प्रचारित हो जाएगा और मोदी सरकार तथा विविध हिंदू संगठन इसे हिंदुओं की जाति व्यवस्था या अन्य किसी परंपरा और व्यवस्था के सर पर आरोप मढते रहेंगे ।
आरोप की और कोई कीमत नहीं है सिवाय इसके कि अपने को दलित कहने वाले समूहों का स्वयं को मूलनिवासी बताकर शेष हिंदू समाज को बाहरी बताने का अभियान जारी रहेगा और तथाकथित हिंदू संगठन वस्तुतः इन झूठे मूल निवासियों के सच्चे मित्र सिद्ध हो जाएंगे और इस प्रकार शायद व्यक्तिगत रूप से संगठनों के सदस्य इन लोगों की कृपा से बाद में कुछ अधिकार पा जाएं परंतु हिंदू समाज का तो यह विनाश ही कर डालेंगे ।।
ऊपर से यह प्रचार जोरों से है कि जाति की बात मत करो ,केवल हिंदुत्व की बात करो।
जिससे और भी अभिलेखीय साक्ष्य हो जाएगा कि जाति कोई बड़ी भयंकर चीज है जो हिंदू समाज में जाने कब से मूल निवासियों का शोषण करने के काम आती रही है।
ऐसी मूर्खतापूर्ण और तामसिक सोच और जाति घातक, देश घातक तथा राष्ट्र घातक विचार कार्य रूप में करते हुए यानी फैलाते हुए हिंदू समाज की जड़ों पर चोट करने वाले समूह स्वयं को हिंदू संगठन कहते लजाते भी नहीं।
और अनेक उच्च कहीं जाने वाली जातियों के सदस्य अपनी मूर्खता बस इन हिंदू संगठनों के इन हिंदू घाती प्रचार का और हिंदू घातक प्रावधान का पक्ष लेते रहते हैं
।
रोने के लिए तो कहा जा सकता है कि लगता है हिंदुओं के विनाश के दिन आ गए और उस विनाश में बहुत बड़ी भूमिका जाति की दिन-रात निन्दा करने वाले हिंदू संगठन और उनके सदस्य ही निभाएंगे ।।
परंतु रोना तो कायरों का काम है और नपुंसक लोगों का काम है ।
आप यदि नपुंसक और कायर नहीं है तो अपने स्तर पर सजग होकर सक्रिय हो जाइए ।।
जाति के विरोधी को यदि दो थप्पड़ या दो जूते नहीं लगा सकते तो उससे हाथ जोड़कर कहिए कि हम आपसे बातचीत नहीं करना चाहते ।।
और जाति का आत्म गौरव स्थापित कीजिए जो कि समाज और राष्ट्र के आत्मगौरव का अभिन्न अंग है ।सहज अवयव है ।
और दलित वाद की विदेशी जड़ों को ,भारत द्रोह को पहचान कर सजग होइए।
और संयुक्त राष्ट्र के मूल निवासी अधिकार घोषणा पत्र का लाभ उठाने की उनकी तत्परता को पहचानिए और तब इस दिशा में अनेक ऐसे कार्य सहज ही हो सकते हैं और वह इस मूलनिवासी अधिकार घोषणा पत्र के आधार पर भी हो सकते हैं ,वह हमारे पक्ष में जा सकते हैं ,अगर आपकी बुद्धि सजग और सक्रिय हो ।।
उसके लिए सर्वप्रथम तो यह आवश्यक है कि आत्म गौरव का भाव रखिए ।।
अपनी अपनी जाति पर गौरव रखिए और समाज के विरुद्ध अपनी जाति के भीतर एक भी शब्द कहने की किसी को अनुमति नहीं दीजिए।
जो जो हिंदू समाज की निंदा करता है ,वह किसी भी जाति का व्यक्ति नहीं है।
वह कुल द्रोही,जाति द्रोही ,समाज द्रोही और इसलिए राष्ट्र द्रोही है ।।
अपनी जाति या किसी भी जाति की कभी भी निंदा नहीं कीजिए ।
दुष्टों को मार भगाइये या उनसे दूर रहिए।।
जातिव्यवस्था हिंदू समाज का सहज अंग है और सहज इकाई है ।।वह किसी भी अन्याय का माध्यम नहीं है।
परंतु किसी भी माध्यम से अन्याय करने वाला अन्याय कर सकता है ।।
अतः अन्याय का समर्थन किसी भी स्तर पर नहीं कीजिए और अन्याय दूर करने के नाम पर जिस संस्था और परंपरा को अन्याय रहित बनाना है ,उसे ही नष्ट करने का जड़ बुद्धि वाला काम मत करिए।।
अपने समाज को शक्तिशाली बनाने के लिए आप मूल निवासी अधिकार घोषणापत्र का अपने पक्ष में उपयोग कर सकते हैं ।।
यह बहुत सरल है।।
परंतु सर्वप्रथम अपना आहार विहार अर्थात अपना अपना सात्विक और श्रेष्ठ भोजन भजन और दिनचर्या को सुरक्षित रखें तथा अपनी मान्यताओं पर टिके रहिए।
उन पर गौरव रखिए।।
सभी द्विज यज्ञोपवीत संस्कार अवश्य करें ।।
वेद पाठ करना सबके वश का नहीं है।
परंतु वेद पाठ कराएं और सुनें। स्वयं करने के चक्कर में न पड़ें ।।
इसके साथ ही शास्त्रों को पढ़ें और काव्य पढ़ें ।
उनकी प्रतिष्ठा करें।
पूजा तिलक चंदन आदि सभी कर्मकांड अनिवार्य रूप से करें ।।
जितना हो सकता है उतना करें ।
संस्कृत अवश्य सीखें और उसका अधिक से अधिक प्रचार करें और संस्कृत पर गर्व करें ।।
क्योंकि मूलनिवासी अधिकार घोषणा पत्र के अनुसार यह सब मूलनिवासी होने की अनिवार्य निशानियां है, लक्षण है ,पहचान है ,गुण है।।
यही आप का आधार है।
इसे कायम रखें ।।
पापी राजनीतिज्ञों ने इन चिन्हों को तोड़ने का अभियान चलाया ।
जनेऊ तोड़ने का अभियान चलाने वाले राजनेता समाज के प्रति अनजाने ही अपराधी हैं ।
उनके प्रति उदार क्षमा भाव रखिए ।परंतु उनको कोई महान व्यक्ति मत मानिए ।।
इस विषय में वे मूर्ख थे।
उनके अनुसरण में आप ने कभी जनेऊ त्याग दिया हो तो पुनः धारण कीजिए। आवश्यक संस्कार संपन्न करके धारण कीजिए ।।
तिलक आदि लगाना आरंभ कीजिए।
और उत्सवों और अवसरों पर अपने परिधान अवश्य पहनिए।
अपनी नीतियों और कर्म कांडों को सुरक्षित रखें और आप में से जो अधिक मेधावी और विद्वान या बुद्धिमान हैं ,वह संसार के विषय में और अधिक जाने तथा जानकर अपनी निजी संस्था या निजी दुकान न चलाएं बल्कि समाज को उन सब की जानकारी दें।
समाज को जानकारी देते हुए और समाज के हित में काम करते हुए अगर अपनी दुकान भी चला रहे हैं, अपना कोई संगठन आदि चला रहे हैं तो उसमें भी कुछ भी अनुचित नहीं।।
लेकिन कोई भी संगठन हिंदू संगठन या ब्राह्मण संगठन या किसी भी नाम से यदि भारत की आधारभूत इकाई यों को यानी कुल समूह ,जाति, खाप,संप्रदाय ,मेडी, आदि की निंदा करे तो उसे रोकिए।।
अपने अपने क्षेत्र में भागवत महापुराण आदि सुननाचाहिए।
स्थानीय स्तर पर प्रचलित शास्त्रों और काव्यों को सुनना, श्रद्धा पूर्वक उनके सुनने का आयोजन करना, दान दक्षिणा और भंडारा ,अन्न सत्र आदि का आयोजन करना :-
यह सब जारी रखेंगे तो आप का मूल निवासी होना सहज सिद्ध होगा और दुष्ट दलित वादी आपको नष्ट करने की पापपूर्ण योजना में तथाकथित हिंदू संगठनों की मदद से भी सफल नहीं हो पाएंगे ।हरि: ॐ तत्सत।
🙏🙏 आदरणीय प्रो रामेश्वर मिश्र पंकज जी के पटल से
Thursday, June 2, 2022
UNO घोषणा पत्र में SC st ही मूल निवासी मनवाने का एजेंडा से भारत मैं वर्ग संघर्ष की साजिश
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