Sunday, April 25, 2021

डरा वो मरा, मन के हारे हार मन के जीते जीत




 


 भारत की स्थिति बहुत गम्भीर बना दी इन असुरों ने। बहुत से निर्दोष लोग असमय मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं। कारण बताया जा रहा है ऑक्सिजन की कमी, फेफड़े ख़राब हो रहे हैं लोग मर रहे हैं।
हम साँस लेते हैं तो हवा सब से पहले फेफड़ों में जाती है, ये फेफड़े ऐसी चीज है जिस की बीमारी का पता आसानी से नहीं लगता, इनके बगल में दिल भी होता है, इनको कवर किए होती हैं हमारी पसलिया, ये पसली एक पिंजरा सा बनाती है, ये पसलियाँ जुड़ी होती है रीढ़ की हड्डी से।
वैसे तो ये पसलियाँ फेफड़ों और ह्रदय की रक्षा करते हैं। मगर फेफड़ों और हृदय में गति होती है, फैलते हैं सिकुड़ते हैं, पसलियों से टकराते भी होंगे, इसलिए यहाँ कफ का होना ज़रूरी है। ये कफ ग्रीस का काम करती है। हमारा शरीर हर समय बलगम बनाता रहता है, ये ज़रूरी भी है 1-2 किलो बलगम शरीर में हमेशा होना चाहिए।
ये बलगम ही धूल, मिट्टी और बैक्ट्रियां को शरीर में घुलने से रोकता है। ये सब बलगम से चिपक जाते हैं। ये बलगम फेफड़ों के आसपास कहीं बनता है। ये बलगम उतना ही ज़रूरी है जितना शरीर में ख़ून। कभी ये रात को सोते समय ये गले में आ जाता है, सुबह लोग परेशान, गर्म पानी पियो निबु पानी पियो, अदरक वाली चाय पियो, बलगम को थूक दो आदि आदि। जैसे बलगम ही झोरोना हो।
आज कल लोग “भोविड़ इन्फ़ेक्शन फेफड़े” की वजह से मर रहे हैं।

  जीवन की मूलभूत यथार्थ मृत्यु थी है
झोरोना काल में लोग इस बलगम या कफ को अपना दुश्मन समझने लगे, लगे कफ सिरप, काढ़ा बना बना कर पीने, पता नहीं क्या क्या गर्म मसाले मिला कर इम्यूनिटी के नाम पर सुबह शाम पिये जा रहे हैं। हुआ ये की शरीर में पर्याप्त मात्रा से कम बलगम रहने लगा। हमारे शरीर को जितनी चिकनाहट मिलनी चाहिए वो नहीं मिली, या कह लो नमी की कमी के कारण सूखने लगे। इसपर मास्क लगाना।
(ये सब मेरा सामान्य ज्ञान है मैं ग़लत भी हो सकता हूँ)
ये सब देखते हुए मैंने दिसम्बर लिखा था :- “हृदय को मन कहते हैं और फेफड़ों को बल कहते हैं, इन्हीं दोनों शब्दों से मिलकर मनोबल बना है” “ना वैक्सिन ना कोई दवा ना दुआ” मनोबल मजबूत करो इम्यून मजबूत होगा।
पता था फेफड़ों को नुक़सान होगा, बग़ल में हृदय, फेफड़े कमज़ोर, हृदय निराश हताश रहेगा भय में रहेगा, इसलिए मैंने दिसम्बर २०२० लिख दिया “मनोबल मज़बूत करो” शारीरिक भी मानसिक भी।
कल पता चला की केंद्र सरकार ने भी दिसम्बर २०२० को दिल्ली सरकार को 8 ऑक्सिजन प्लांट लगाने के पैसे दिए, जिस में से केवल एक प्लांट लगा।
एक छोटा सा विचार एक बीज जैसा होता है, उसको आपने अपने हृदय में रोप दिया उस विचार का वृक्ष बनना तय है।
वो वृक्ष किस का होगा, ये आपके विचार पर निर्भर करता है।
जो बोया वो पाया। खर पतवार उखाड़ फेंको।
मैंतो शुरू से कह रहा था “वो रेंचो तुम्हारे दिमाग से खेल रहा है” ।
  जिसकी रिपोर्ट +ve आएगी वह क्या करेगा?

टीवी ने जो डर फैला दिया है उसे देखते हुए
मरीज़ हाथ पर मिनट-मिनट में सैनेटाइजर प्रयोग करेगा,
दिन-रात मास्क लगाकर रखेगा, बार-बार एक साइको की तरह ऑक्सीजन लेवल चैक करेगा, उसके परिवार वाले भी यही करेंगे।
मास्क लगातार लगाए रखने से 99% आपका ऑक्सीजन लेवल गिरना तय है। ऑक्सीजन लेवल गिरते ही हॉस्पिटल भागेगा। वहां अफरा-तफरी देख और दबाव मान जाएगा, इससे ऑक्सीजन लेवल और गिरेगा। फिर सोचेगा कैसे भी ऑक्सीजन सलेंडर मिल जाए। मंहगा ऑक्सीजन सलेंडर लगवा लेगा। उसका लेटे-लेटे बस ध्यान इस और रहेगा कहीं तु मरने वाला तो नहीं, कहीं तु मर तो ना जाए, तेरे बाद तेरे परिवार का क्या होगा। यह सोचते-सोचते और दबाव मान जाएगा।
फिर डॉ० उसे वेंटिलेटर पर रख देंगे।
अब भी लगातार उसके दिमाग में आड़-कबाड़ चल रहा होता है। वेंटिलेटर से जबरदस्ती सांस दिया जाता है तो उसकी सांस कार्यप्रणाली धीरे-धीरे कम काम करने लगती है बंद हो रही मशिनरी को जंग लगने लगता है और फेल होने सी कागार पर पहुंच जाती है। इस स्थिति में उसे कुछ भी कहा जाए वही उपयोग करने को तैयार होता है। डॉक्टर मरीज़ के परिज़न को Remdesivir जैसे useless injection मंगवाते है और भी विभिन्न प्रकार के injection ठोक दिए जाते है।
हालात गंभीर हो जाती है और परलोक की तैयारी हो जाती है।ां
#समाधान:-
भारत में अधिकत्तर आबादी को पता ही नी उन्हें कथित कोरोना है कि नहीं। क्या आपने ऐसा केस सुना है जिसको मौत होने के बाद पोस्टमार्टम में पता चला हो इसकी मौत का कारण कोरोना था।
ऐसा कोई केस नहीं मिलने का। कोरोना होने का मुख्य कारण है कोरोना टेस्ट करवाना। जबतक आपको पता नहीं है आप +ve है या -ve तब तक आप स्वस्थ रहेंगे ऐसे बहुत लोग होंगे जिन्हें कथित कोरोना होकर जा लिया लेकिन उन्हें पता भी नी चला।

यदि आप टेस्ट करवाएं +ve रिपोर्ट आई और आप वहमी परिवार से है तो आप वही करेंगे जो सबसे ऊपर लिखा है।
यदि आप ऐसे परिवार से है जहां टोंट मार कर boost up किया जाता है जैसे कोई जोर से खांस रहा हो, " मरेगा कै आराम तै खांस ले नै",
किसी को तेज़ बुखार होगया, "रै मरैगा तु तो, न्यू करिए आज नी कल नै मर लिए, आज थोड़ा काम है हामनै, कल ना रो लेंगे तन्नै।"
"अच्छा न्यू तो बता लकड़ी कौनसी तैयार करां जै तु मरग्या/मरगी।"

मतलब हंसी-मज़ाक में उसे boost up करेंगे।
लेकिन यदि ज्यादा इमोश्नल होकर दिल को बार-बार भरेंगे। बोलेंगे तेरे बिना हमारा क्या होगा हमारा, हम किसके सहारे जिएगें etc तो मरीज़ बहुत टुट जाता है उसके दिमाग में स्वस्थ होने से ज्यादा वह इमोश्नल बातें चलती रहती है।

पहले तो यही करना है कोरोना का टेस्ट नहीं करवाना क्योंकि लगभग पॉजिटिव आना तय है। Positive आ गए तो सबसे पहले मास्क का प्रयोग ना करें वरना ऑक्सीजन लेवल 99% गिरेगा ही। घर पर रहे हॉस्पिटल जाकर धक्के ना खाए।
Santizar में alcohol है वह सिर में चढ़ती है। जिसने दारु नी पी कभी उसको तो नॉर्मल दारु सुंघने पर भी बहुत महसूस होती है और Santizar में alcohol की मात्रा आम दारु से ज्यादा है यह तो सिर में चढ़ता ही है। इसका प्रयोग ना करके बस साबून से ही हाथ धो ले।

जो मन को सबसे अच्छा लगे वह खाएं। चाहे वह कुछ भी हो बर्गर, पिज्जा, समोसा। जो मर्जी जो आपको सबसे ज्यादा पंसद हो। यही आपको स्वस्थ करेंगे।
लोग बेसक कहें ये जंक फुड नुकसान दायक है लेकिन जब आप बिमार हो तो जो मन को सबसे ज्यादा पंसद है वह खाने से व्यक्ति 80% जल्दी स्वस्थ होता है।
हां ठीक हो जाने पर जरुर इनको कुछ महीने के लिए बिलकुल त्याग दे।

#COVID19 #COVID21

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