अपनी पिछली पोस्ट में मैंने एक नरसिंह जी की मूर्ति का जिक्र किया था जो जर्मनी में मिली ये मूर्ति 33 हज़ार वर्ष पुरानी है तब एक मित्र ने एक वीडियो लिंक दिया, वीडियो का टाइटल था :-
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“26,450 Year Old Hindu Idol of Lord Shiva” - Kalpa Vigraha.
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https://www.youtube.com/watch?v=qhHQT0HYWq0&feature=youtu.be
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इस में ये भगवान शिव की मूर्ति नहीं है ये भगवान विष्णु जी की मूर्ति है ।
इस को #कल्प_विग्राह (Kalpa Vigraha) कहते हैं ये #26450_ईसा_पूर्व की श्री विष्णु जी की मूर्ति है, ये मूर्ति 1959 में नेपाल के Lo Manthang इलाके में एक बोद्ध भिक्षु को मिली, 47 ग्राम वजनी ये मूर्ति एक लकड़ी के बॉक्स में थी, कुछ ही समय में वहां अमेरिका से C I _A के कमांडो आये और मूर्ति को अपने कब्जे में ले लिया।
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बक्से को अपने कब्जे में ले कर उस पर लेबल लगाया गया “ST Circus Mustang-0183” फिर इस को C I,. A ने अमेरिकन आर्मी बेस कैंप Hale , near Vail , Colarado में रखा, बॉक्स में से मूर्ति के साथ एक प्राचीन पांडुलिपि (manuscript) भी मिली।
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मूर्ति 5.3 cm लम्बी और लगभग 4.7 cm चोडी है, वजन 47 ग्राम, जिस बॉक्स में मूर्ति रखी गई थी वो भी विशेष धातु और लकड़ी का बना था। मूर्ति के नीचे शिव पर्वती जी की अकर्ति भी है। इन सब की कार्बन डेटिंग करने पर ये 26450 ईसा पूर्व की बताई गयी।
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इस पुरे प्लान में सीआईए के निदेशक जॉन मैककन व्यक्तिगत रूप से शामिल थे।
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बाइबल में बिग बैंग को 4004 ईसा पूर्व बताया गया है इस ही हिसाब से अंग्रेजो ने मिस्र के पिरामिड मेसोपोटामियन आदि की भी उम्र भी उस समय के आस पास तय कर दी, भारत के लिए मोहनजोदड़ो और हड़प्पा सिन्धु सभ्यता जैसी नकली सभ्यता बनाई, केवल अपने 4004 ईसा पूर्व को सच साबित करने के लिए। लेकिन जब 33 हज़ार साल, 26 हज़ार साल पुरानी मूर्ति मिलती हैं तो इन की सब थ्योरी गलत हो जाती है।
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इस मूर्ति के साथ पांडुलिपि का मिलना जिस में इस मूर्ति की उपयोगिता, इस का इस्तेमाल और इस का नाम भी लिखा है, इस मूर्ति का नाम का अनुवाद किया गया तो ये "कलपा महा-आयुष रसयान विग्रा" मिला, सीआईए ने इस का नाम "कालपा विग्राहा" रखा।
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बोद्ध भिक्षु ने सीआईए को यह भी बताया कि अगर यह मूर्ति किसी तांबे के लोटे में पानी भर कर 9 दिन तक रखा जाये तो इस मूर्ति से पानी चार्ज हो जाता है। ये पानी पीने वाले की उम्र बहुत ज्यादा हो जाती है। सीआईए ने इस विधि को किया और पानी को अलग अलग प्रयोगशालाओं में भेजा गया, और सब प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट सीधे सीआईए निदेशक, जॉन मैककॉन को भेजे गए ।
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इस के बाद सीआईए ने एक टीम तैयार की (#Watering_Team) जिन को ये पानी पीने को दिया गया। 1960 के आस पास ये प्रयोग किया गया। आज सब टीम के मेम्बर अपने पर पोतो के साथ हंसी ख़ुशी जीवन बिता रहे हैं, कल्प विग्रह के प्रयोग वाले सब कम से कम 110 वर्ष की आयु के पास हैं, कुछ नामो को छोड़ दिया जाये तो सब स्वस्थ और दीर्ध आयु वाले हैं, और जो मर गए उन में रूथ गोलोन्का, एक कार दुर्घटना से मर गई, विली ली मॉर्गन की हत्या कर दी गई थी। स्टीवन मार्टिन और बर्ट जेनकींस वियतनाम में मृत्यु हुयी थी ।
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इन ही सदस्यों ने दुनिया को ये भी बताया की कल्प विग्रह 1996 में अपनी पाण्डुलिपि के साथ चोरी हो गयी सीआईए के पास से अमेरिका के आर्मी कैंप से। बहुत खोज हुयी हजारो लोगो से पूछताछ की गयी सरकारी, सेना के ऑफिसर से मगर मूर्ति नहीं मिली। लाखो डालर का इनाम भी रखा गया है । बहुत लोगो की हत्या भी हुयी है जिस में microbiology वाले अधिक हैं।
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अब आते हैं मुख्य बात पर विष्णु जी की मूर्ति है :- मूर्ति के हाथ में सुदर्शन चक्र, विष्णु जी के चार हाथों में से एक में शंख, एक में कमल, एक में गदा रहते हैं।
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सुदर्शन चक्र भगवान शिव जी ने विष्णु जी को दिया था विष्णु जी की भक्ति से प्रसन्न हो कर।
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विष्णु जी को संरक्षक के रूप में पूजा जाता है इस ब्रह्मांड के संरक्षक, ये एक परमाणु से ले कर ब्रह्मांड तक सब को बैलंस करते हैं, असुर हो या कीटाणु या आप के विचार सब की शुद्धी विष्णु जी करते हैं। इन बुरइयो को खतम करने के लिए विष्णु जी एक बार कैलाश पर्वत गए शिव जी से शक्ति मांगने। तब #चीन_से_वीजा_नहीं लेना पड़ता था अब शायद केदारनाथ, अमरनाथ के लिए भी लेना पड़े !
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विष्णु जी ने शिव जी के नामो का जाप करना शुरू किया हजारो कमल के फूल अर्पित किये, कई मंत्रों का जप किया, कई दिनों तक ये क्रम चलता रहा।
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एक दिन भगवान शिव ने उन हजारो कमल के फूलो में से एक फुल उठा लिया, जब विष्णु जी को अहसाह हुआ की एक फूल कम है तो उन्होंने अपनी एक आंख निकाल कर वहां रख दी, शिवजी प्रसन्न हो कर विष्णु जी के सामने उपस्थित हुए और उन्हें सुदर्शन चक्र के भेंट किया।
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सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल बहुत ही कम हुआ है ये अंतिम उपाय के तोर पर इस्तेमाल होता है । ऋग्वेद, यजुर्वेद और पुराणों में लिखा है की ये कानून, व्यवस्था और संरक्षण के लिए और दुश्मन को खत्म करने के लिए अंतिम हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
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अब वापस चलते हैं कल्प विग्रह "कलपा महा-आयुष रसयान विग्रा" सीआईए अमेरिका :- ताम्बे के लोटे में पानी पीना ये परम्परा तो सदियों से चली आ रही है उस लोटे में चांदी या सोने का सिक्का रख कर, पानी को रात भर रख कर सुबह खाली पेट पीने से बहुत लाभ होता है ये हर कोई जनता हैं तो ये सीआईए क्यूँ इतने करोडो डॉलर खर्च कर रहा था ?
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असल मे वो मूर्ति विष्णु भगवान की थी और उन के हाथ में सुदर्शन चक्र है और एक पाण्डुलिपि। ये जुड़ता है 3 6 9 वाले निकोल टेस्ला जिन का जिक्र पिछली पोस्ट में किया था ।
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***(आगे पोस्ट पड़ने से पहले ये बता देना चाहता हूँ की आगे की बाते गलत भी हो सकती है ये मेरी दिमाग की उपज है मैं विज्ञान का स्टूडेंट नहीं था इस लिए जानकारी 18 – 20 हो सकती है इसलिए इग्नोर करे बहस न करे)****
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निकोल टेस्ला ने वेदों का उपनिषदों का गहन अध्यन किया । करीब 200 से ज्यादा आविष्कार किये। जिस का आज भरपूर प्रयोग हो रहा है। जिस में सब से ज्यादा electromagnetic wave का इस्तेमाल हो रहा है इस को Scalar Wave कहा जाता है। इस ही थ्योरी पर निकोल टेस्ला ने काम किया था।
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“In the 1930's Tesla announced other bizarre and terrible weapons: a death ray, a weapon to destroy hundreds or even thousands of aircraft at hundreds of miles range, and his ultimate weapon to end all war -- the Tesla shield, which nothing could penetrate. However, by this time no one any longer paid any real attention to the forgotten great genius. Tesla died in 1943 without ever revealing the secret of these great weapons and inventions.” ^^^^
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इस पर फिर आते हैं अभी जो बात दिमाग में आई वो ये की आज कल ये तूफ़ान बहुत आ रहे हैं एक बार आया दो बार आया तीन बार आया फिर तो रोज ही आता जा रहा है आगे ही नहीं बड रहा अटक गया नार्थ इंडिया में।
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दो दिन पहले शाम को 4 बजे मोसम ठीक था अचानक अँधेरा हो गया ऐसा लगा की रात हो गयी तूफ़ान आया 15 मिनट के बाद फिर उजाला हो गया, तब मैंने अपने दोस्त को कहा की अर्जुन ने आज फिर किसी जयद्रथ को मारा होगा वो बोला अबे कितने जयद्रथ है ?
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महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन ने प्रतिज्ञा ली थी की सूर्यास्त से पहले जयद्रथ का वध करूँगा नहीं तो आत्मदाह कर लूँगा, जयद्रथ को कौरव सेना ने छुपा दिया था, संध्या हो गयी थी, सूरज अस्त हो गया था, जयद्रथ और दुर्योधन सामने आये और अर्जुन को आत्मदाह करने के लिए कटाक्ष किया, तब ही श्री कृष्ण बोले की पार्थ ! तुम्हारा शत्रु तुम्हारे सामने खड़ा है, उठाओ अपना गांडीव और वध करो, देखो अभी सूर्य अस्त नहीं हुआ है यह कह कर श्री कृष्ण ने अपनी माया समेट ली।
इस को बोलते हैं HAARP टेकनोलोजी, जिस से आप मोसम वर्षा आदि को नियंत्रण कर सकते हैं ये ही scalar एनर्जी है। इस माया को बनाने में श्री कृष्ण जी ने सुदर्शन चक्र को scalar interferometer मोड में इस्तेमाल किया जिस से वायुमंडल में अँधेरा छा गया। ये ही अस्त्र निकोल टेस्ला ने भी बनाया है जिस का लिंक दे रहा हूँ।
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http://www.cheniere.org/books/part1/teslaweapons.htm
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सुदर्शन चक्र ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त ऊर्जा द्वारा बनाया गया था। इस चक्र में 108 दांत (teeth) होते हैं तब ये सुदर्शन चक्र दिमाग से नियंत्रित होता था। इसे केवल ज्ञात मंत्र द्वारा सक्रिय किया जा सकता था।
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^^^^ अब वापस आते हैं सीआईए निकोल टेस्ला पे, कल्प विग्रह केवल ताम्बे के लोटे में पानी पीना नहीं था तब रिसर्च चल रही थी सुदर्शन चक्र पर जो चलता है scalar energy पर electromagntic wave पर। यहाँ पर वेदों की प्राण उर्जा और आकाश जो विवेकानंद शिकागो में बोल के आये थे जिस को निकोल टेस्ला ने समझा और इस पर काम किया।
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Scalar wave ये काम करता है दिमाग से जिस को टेस्ला ने zero point energy कहा है और हम ने शिव कहा, सारा काम तरंगो का है ये तरंग 8 का आकर में घुमती हैं हमारा डीएनए भी 8 के आकार में होता है और हमारे डीएनए में सब जानकारी स्टोर रहती है। ये तरंगे समझने में तो बहुत आसान है, जैसे बिजली का ब्लब एक सर्किट पूरा हुआ तो लाइट जल गयी लेकिन जब इस में विद्युत चुम्बकीय जुड़ जाता है तो ये विकास भी करता है और विनाश भी।
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विकास होता है इलाज के रूप में जिस से बीमारियों से मुक्ति मिलती है जिस को आज कल homepathy कहा जाता है ये वो ही विज्ञान है मीठी गोलियों में जल की मात्र मिला का इलाज किया जाता है। पथरी, शुगर, हाई bp, कैंसर, स्ट्रोक, आर्थराइटिस, जैसे कई बीमारियों का इलाज किया जाता है। ये केवल जल के उपयोग से होता है। पानी की एक मात्र में कुछ तत्वों के साथ शरीर में पहुचाया जाता है । ये जल बहुत से कीटाणु का खतमा करता है। ये विज्ञान भी वेदों से लिए गया है ।
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हमारी पृथ्वी में 75% जल ही है और हमारा शरीर भी 70% जल ही है और हमारा मष्तिक 80% जल ही है जल ही मष्तिक है या मष्तिक ही जल है उस ही जल में पीनियल ग्लैंड है जो शिव है और शिव लिंगम पर ताम्बे के लोटे से जल चड़ाया जाता है । ये ही जल हाइड्रोजन या मोनो आक्साइड के नाम से जाना जाता है पीरियाडिक टेबल में पहले नंबर पर है पीरियाडिक टेबल में 108 तत्व खोजे गए थे और गंगा नदी के जल में 108 में से 84 तत्व मिलते हैं शिव को गंगा जल चडाया जाता है।
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हाइड्रोजन बम अब तक का सब से खतरनाक बम है परमाणु बम से भी ज्यादा ये सब उस के चार्ज होने पर निर्भर करता है ये ही हाइड्रोजन हमारे दिमाग की कोशिकाओ को बनाता है ये ही हाइड्रोजन बम के रूप में विनाश करता है। हमारे शरीर में एक ब्रह्मांड है या ब्रह्मांड में हमारा शरीर दोनों एक ही बात है।
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ये सब विज्ञान scalar एनर्जी का हिस्सा है ये विज्ञान श्री यंत्र में है ये विज्ञान मिस्र के पिरामिड में है ये ही विज्ञान 54 देवी शक्ति पीठ में है। इस को ही निकोल टेस्ला ने scalar electromagnetic interferometer कहा है ये ही सुदर्शन चक्र है। सब काम तरंगो से होता है। electromagnetic वेव्स पैदा होती हैं दो विरोधी तरंगो के चरणबद्ध तरीके से से भेजी जाती हैं इन ही तरंगो से सुनामी आती है तूफ़ान आता है ये वायुमंडल को कंट्रोल भी करती हैं। रूस अमेरिका जर्मनी सब लगे हुए हैं इस scalar एनर्जी से superweapon बनाने में।
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टेस्ला के scalar electromagnetic interferometer पर रूस ने बहुत काम किया है बहुत मिसाइल बनायीं हैं। टेस्ला के इस आविष्कार से मोसम में कहीं भी बदलाव किया जा सकता है। इस में दो मोड होते हैं "एंडोथर्मिक" मोड में “ होविट्जर” मोड ये बहुत दूर से लक्ष्य को ठंडा या गर्म कर सकता है केवल तरंगो के द्वारा ये एक वैकुयुम बना देता है जैसा आज कल तूफ़ान का नाटक चल रहा है। ये ही नहीं ये काला बुखार, पीला बुखार, फ्लू वायरस, बैक्टीरिया मतलब ये जीवित कोशिका को भी नुक्सान पंहुचा सकता है या पंहुचा रहा है
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